यूजीसी एक्ट 2026 को लागू किया जाए - जीत बहादुर मौर्य

  

Uttar Pradesh


गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

अपनी जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष जीत बहादुर मौर्य के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल यूजीसी एक्ट 2026 सहित अन्य मांगों को लेकर जिलाधिकारी गोरखपुर से मिलकर राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन दिया। 

भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण एवं संविधान सम्मत एससी/एसटी, ओबीसी और ईडब्लूएस छात्रों के साथ हो रहे जातीय अपमान व भेदभाव रोकने की दिशा में यूजीसी एक्ट 2026 धर्म, जाति, नस्ल, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव रोकने हेतु एक महत्वपूर्ण सुधारात्मक कदम है। यह विधेयक भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14. 15. 16. 17. 18. 21 एवं 21 क, के अन्तर्गत, समानता. गरिमा और शिक्षा के अधिकार व समता की भावना को सुदृढ़ करता है। यूजीसी एक्ट 2026 से विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक मानकों का एकीकरण, प्रशासनिक उत्तरदायित्व तथा विद्यार्थियों के हितों की रक्षा-सुरक्षा सुनिश्चिति होगा। जिससे पी.एच.डी. छात्र रोहित वेमूला, और डा० पायल तडवी, और आई.आई.टी. छात्र दर्शन सोलकी, जैसी घटनाओं का कोई शिक्षार्थी शिकार न बने। भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों में भेद-भाव के महत्त्वपूर्ण दृष्टान्त निम्नवत



1-भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में कम से कम 27-30 छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं दर्ज की की गई हैं, जिनमें आईआईटी कानपुर से सबसे अधिक (हाल के वर्षों में 9) मामले सामने आए हैं।

2-हाल की घटनाएँ 4 फरबरी 2026 तक, आईआईटी बॉम्बे में आत्महत्या का एक नया मामला सामने आया। इससे पहले 20 जनवरी, 2026 को आईआईटी कानपुर में एक ऐसा ही मामला सामने आया चुका था। राज्य सभा में प्रस्तुत सरकारी आंकड़े के अनुसार 2018 से 2023 तक उच्च शिक्षण संस्थानों में 98 आत्महत्यायें उजागर हुई है। जिनमें से 39 आईआईटी से 25 एनआईटी और 25 केन्द्रीय विश्वविद्यालयों से है।

3. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2023 के आकड़ों के अनुसार 2023 में छात्रों द्वारा आत्महत्यों की संख्या 13892 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयी।

4. कम रिर्पोटिंग आईसी-3 (इन्टरनेट क्राइम कम्पलेन्ट सेन्टर), संस्थानों की 2025 की एक रिर्पोट में अनुमान लगाया गया है कि प्रत्येक वर्ष 13000 से अधिक छात्र आत्महत्या के शिकार होते हैं। जिससे पता चलता है कि कलम और रिर्पोटिंग की कमी या गलत वर्गीकरण के कारण संख्या कम बतायी जा रही है। प्रमुख संस्थानों में आत्महत्याओं एक बड़ा प्रतिशत अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों का होता है। आंकड़ो से स्पष्ट हुआ कि जातिगत भेदभाव के कारणों से प्रभावित होकर उच्च शिक्षण संस्थानों में घटनाएं बड़े पैमान पर हो रहीं है।

अपनी जनता पार्टी देश व छात्रहित को ध्यान में रखते हुए यू.जी.सी. विधेयक 2026 का समर्थन करती हैं, और इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु महामहिम राष्ट्रपति महोदया से मांग करती है. उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव व हिंसा समाप्त करने हेतु यू.जी.सी विधेयक 2026 को प्रभावी ढंग से लागू करवाने की कृपा करें।

इस प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से राम प्रताप मौर्य जिला महासचिव, कमलेश मौर्य जिला उपाध्यक्ष, श्रवण कुमार मौर्य जिला उपाध्यक्ष, मोतीलाल, विनोद कन्नौजिया, सुग्रीव मौर्य एवं राजू निषाद जिला कार्यकारिणी सदस्य, आदित्य मौर्य विधानसभा अध्यक्ष ग्रामीण आदि सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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